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Thursday, May 6, 2021

अंधेरे में रोशनी !!




है ये जिन्दगी का इम्तिहान
हर हाल में जीत कर दिखायेंगे
माना कि ये जंग नहीं आसान फिर भी 
सब्र और संयम की ढाल अपनाकर 
हर हालात पर काबु पाएँगे 

एक - दूसरे का रखते हुए ध्यान 
मदद के हाथ भी आगे बढ़ायेंगे 
एकता की देते हुए पहचान 
अपने - पराये, हर रिश्तों को और भी मजबुत बनाएँगे 

नतीजों से हो भले सब अनजान 
अपने प्रयत्नों में कमी नहीं लाएँगे 
किसी के जीवन में भरेंगे मुस्कान 
किसी की चिंता और मायूसी दूर भगाएंगे 

अग्रणी कार्यकर्ताओं को देते हुए सम्मान 
हौसले उनके और बढ़ाएंगे 
दूर हो जाएगी जीवन की ये थकान 
अगर किसी का जीवन हम उज्जवल कर पाएँगे


ईश्वर का है अगर ये फरमान 
अंधेरे में रोशनी भी वो ही दिखाएंगे 
हर दिल का पूरा होगा अरमान
नई आस के साथ फिर चैन और सुकून की जिंदगी बिताएंगे

अलका डांगी

Monday, May 3, 2021

बदलना जरूरी है.!!

समय के साथ बदलना जरूरी है.! 

देश और समाज की उन्नति के लिए 
हर राह पर अनवरत प्रगति के लिए 
नई तकनीक नई सोच में ढलना जरूरी है 
समय के साथ बदलना जरूरी है.! 

हर एक पीढ़ी के नजरियों को तवज्जो देने के लिए
किसी के ज़ज्बात और हालात के पीछे की वज़ह समझने के लिए
रिश्तों की गरिमा और नजाकत बरकरार रखने के लिए 
उम्र के हर मोड़ पर साथ चलना जरूरी है
समय के साथ बदलना जरूरी है.! 

अपनी मेहनत और मशक्कत से हासिल सफलता कायम रखने के लिए 
मुश्किल घड़ी में संभलने और आगे बढ़ने के लिए 
कभी अपने तो कभी अपनों का भविष्य उज्ज्वल करने के लिए 
त्याग और समर्पण भी जरूरी है 
समय के साथ बदलना जरूरी है ! 

मानव जन्म को सफल और सार्थक बनाने के लिए 
जरूरत मन्द को मदद का हाथ बढ़ाने और सहारा बनने के लिए 
दूसरों के जीवन में खुशियाँ और बहार भरने के लिए 
करुणा-वात्सल्य से भरा सरल मन होना जरूरी है
समय के साथ बदलना जरूरी है.! 

अलका डांगी 





Wednesday, March 31, 2021

इन्सानियत ही व्यक्ति की पहचान!!

धरती पर जब जन्म लेता है इंसान
इन्सानियत ही होती है व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान

तुम रंग - रूप और कद - काठी निहारते हो
गोरे - काले, ऊँचे - नीचे, मोटे - पतले का भेद जता
हीन भावना का एहसास दिलाते हो
जो ईश्वर की देन है उसकी हँसी उड़ाते हो
एक अच्छे - भले, सीधे - सरल इंसान का आत्मविश्वास डगमगाते हो
आखिर क्यूँ नहीं दे सकते हम सभी को एक जैसा सम्मान 
इन्सानियत ही तो होती है व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान 

किसी के सपनों की उड़ान भरने से पहले ही उसके पर काट, 
अपने अहं की संतुष्टि और अभिमान का झंडा लहराते हो 
किसी की मंजिल की राह में रूकावट डाल अपनी कामयाबी का जश्न मनाते हो 
राजनीति के दाँव पेंच खेल अपनी हुकूमत चलाने की खातिर 
किसी को नीचा दिखा उसका अस्तित्व मिटाते हो 
धर्म, रूढी और परंपरा के नाम से दंगा - फसाद फैला 
इंसान को इंसान से लड़वाकर आतंक बढ़ाते हो 
आखिर क्यूँ नहीं हम मुसीबत और जरूरत में 
इक - दूजे का सहारा बन अडिग रहें मील के पत्थर के समान 
इन्सानियत ही तो होती है व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान 
 
क्यूँ रहते हैं हम जानकर भी अपने ज़मीर से अनजान.!! 
कब तक देना पड़ेगा हर मोड़ पर इन्सानियत का इम्तिहान!! 
कब तक देते रहेंगे मासूम और निर्दोष अपनी जान!! 
क्या इन्सानियत से बढ़कर है किसी की आन-बान-शान 
कब समझेंगें कि इन्सानियत ही है व्यक्ति की असली पहचान!! 

अलका डांगी 


Monday, March 22, 2021

परिवार

आपसी समन्वय परिवार की शान है
छोटे - बड़े, जहाँ करते सभी इक - दूजे का सम्मान है
बड़ों का बड़प्पन, छोटों का मस्त-मौलापन 
हर दिल के अरमान रखता जवान है
सलाह - मशवरा और परामर्श से
मिल जाता हर मुश्किल का समाधान है 
सुख - दुख में साथ खड़े होकर 
मिट जाती जीवन की थकान है 
बुजुर्गों का तजुर्बा, जवाँ दिलों का नजरिया 
मिलकर बना देते हर कार्य आसान है 
आपसी टकराव हो या हो मनमुटाव 
फिर भी सदा रखते एक - दूसरे का ध्यान है 
इसके जैसा जीवन में है नहीं कोई बन्धन 
परिवार से जुड़कर ही बनती सबकी पहचान है |

अलका डांगी 


Sunday, March 21, 2021

कविता

हर कवि की रूह होती है कविता
मन की भावना और कल्पना की छवि होती है कविता
कुछ कहे कुछ अनकहे शब्दों में जान भरती है
और दिल के झरोखों से उड़ान भरती है कविता
कभी प्रेमिका तो कभी बागी बनती है 
अपने तजुर्बे से महान बनती है कविता 
कोई प्यार से अपनाए चाहे कोई ठुकराए
दिलों में फिर भी जवान रहती है कविता 
चाहे भक्ति कहो चाहे कहो इसे शक्ति
अंतर्मन में नित्य चलने वाली कश्ती है कविता
जीवन का सार है, कभी तकरार है, मन की पुकार है, 
हर वक़्त हृदय में जिसके बहती है कविता 

अलका डांगी 

 




Thursday, March 11, 2021

विचार!!




विचारों का क्या है ये तो आते जाते रहते हैं 
कभी अच्छे कभी बुरे, जहन में हलचल मचाते रहते हैं 
सृजनात्मक हो तो अपने साथ सारी सृष्टि का हो जाता है उद्धार 
विनाशक बन जाए तो हो जाता है नष्ट - भ्रष्ट समस्त संसार.! 

इनकी मर्यादा में  ही है सुखी जीवन का सार
कुछ हमारे विचार , कुछ तुम्हारे विचार 
व्यक्त करो, कर लो साझा या लो जीवन में उतार 
इनको सहजो, या लो फिर इन्हें सँवार 
पर जबरन किसी पर थोपते फिरो अपने विचार 
नहीं देता है कोई, किसी को भी ये अधिकार ! 

विचारों में भी शक्ति होती है अपार 
सकारात्मक हो तो जीवन हो जाता साकार 
नकारत्मक कर देता जीना ही दुश्वार 
सोच समझ कर सींचना इन्हें हर बार 
आखिर अपने विचारों की नैया के हम ही तो हैं खैवनहार.!

अलका डांगी 

Friday, March 5, 2021

बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया !!

ये बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया.!! 

जवानी में इसकी बात न मानी 
जिम्मेदारी और भागदौड़ में अपने 
शरीर की कदर न जानी
और समय हाथ से निकल गया 
ये बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया.!! 

इसने तो अपने लिए जीने का समय दिया 
ढलती शाम की रंगीनियत का परिचय दिया 
अपने अधूरे ख्वाब और शौक फिर से अपनाने का ज़ज्बा दिया 
पूरा जीवन तजुर्बे से भर गया 
ये बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया  !! 

योग, प्राणायाम, और ध्यान  लगाकर 
श्वाछोश्वाश की तरफ ध्यान केंद्रित किया 
धर्म, अध्यात्म और समाज सेवा से जुड़कर 
जीवन का मर्म समझ लिया 
समय का खालीपन भरता गया 
ये बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया !! 

बच्चों और परिवार के साथ बेफ़िक्र हो 
हर सम्बंध और गहरा किया 
दोस्तों के साथ गपशप और ठहाके लगाकर 
अपने आयुष्य को लंबा किया 
नया ज़माना, नई पीढ़ी, नई सोच के साथ 
जीवन में नए अनुभव भरता गया 
ये बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया !! 

हर जीवन का ये अभिन्न अंग है 
आज हमारे तो कल किसीके संग है 
तन पर हमारा बस नहीं तो क्या 
गर हर मन में जीने की उमंग है 
फ़िर जिंदादिल और प्रफुल्लित
 जीवन का हर क्षण हो गया 
ये बुढ़ापा तो यूँ ही बदनाम हो गया !! 


अलका डांगी