दिलो-दिमाग पर हावी होने की
इसने छोडी न कहीं कोई कसर है
कभी यूँ ही बेवजह, बेबाक चला आता है
स्वस्थ तन-मन में बसा लेता अपना घर
धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत बनाता है
हावी हो जाता है अदृश्य शक्ति बनकर
मुश्किल बना देता है जीवन भर का सफर !
कभी हार की तो कभी तकरार की वज़ह बन जाता है
मंडराता रहता दुःख और चिंता का साया बनकर
शातिर , चालाक और बड़ा मौकापरस्त होता है
राज करने लगता है कमजोर और घायल मन पर !
उच्च मनोबल के सामने कभी टिक नहीं पाता
कोशिश लाख कर के भी हो जाता बेअसर
आत्मविश्वास और बेफिक्री को दे नहीं सकता टक्कर
और एक दिन काफूर हो जाता है
हिम्मत और हौसलों से भरी उड़ान देखकर !
डर तो दस्तक देता है जीवन के हर कदम पर
सम्भल जाना पहले ही इसकी आहट सुनकर
भरोसा रखना सदा खुद पर
गिरकर , थककर , टूटकर भी
हावी होने न देना डर को अपने ऊपर
चलते रहना , आगे बढ़ना अनवरत होके निडर
डर से जीत गए तो ख़ुशनुमा होगा जीवन का हर सफर |
अलका डांगी