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Thursday, September 9, 2021

धर्म ..



धर्म है
तो विनय और विवेक है
धर्म है 
तो हर दिल नेक है
धर्म है 
तो शुद्ध विचार और आचार है 
धर्म है 
तो जीवन का उद्धार है 

धर्म मानवता है 
धर्म समभाव है
धर्म दया और करुणा है
धर्म मैत्री भाव है

धर्म में सुख-शांति का एहसास है 
धर्म में संतुष्टि का निवास है 
धर्म में मोह-माया  , छल - कपट नहीं 
धर्म में सच्चाई और सरलता का निवास है 
धर्म में आग्रह नही, धर्म अनेकांत है, 
धर्म की पहचान किसी जाति या मजहब से नहीं 
धर्म कर्तव्यनिष्ठ और शान्त है |


अलका डांगी 

Tuesday, September 7, 2021

डर !

ये डर भी बड़ा निडर है 
दिलो-दिमाग पर हावी होने की 
इसने छोडी न कहीं कोई कसर है 
कभी यूँ ही बेवजह, बेबाक चला आता है 
स्वस्थ तन-मन में बसा लेता अपना घर 
धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत बनाता है 
हावी हो जाता है अदृश्य शक्ति बनकर 
मुश्किल बना देता है जीवन भर का सफर !

कभी हार की तो कभी तकरार की वज़ह बन जाता है 
मंडराता रहता दुःख और चिंता का साया बनकर 
शातिर , चालाक और बड़ा मौकापरस्त होता है 
राज करने लगता है कमजोर और घायल मन पर !

उच्च मनोबल के सामने कभी टिक नहीं पाता 
कोशिश लाख कर के भी हो जाता बेअसर 
आत्मविश्वास और बेफिक्री को दे नहीं सकता टक्कर 
और एक दिन काफूर हो जाता है 
हिम्मत और हौसलों से भरी उड़ान देखकर !

डर तो दस्तक देता है जीवन के हर कदम पर 
सम्भल जाना पहले ही इसकी आहट सुनकर 
भरोसा रखना सदा खुद पर 
गिरकर   ,  थककर  , टूटकर भी 
हावी होने न देना डर को अपने ऊपर 
चलते रहना  , आगे बढ़ना अनवरत होके निडर 
डर से जीत गए तो ख़ुशनुमा होगा जीवन का हर सफर |



अलका डांगी 












Thursday, July 29, 2021

जिंदगी की नई शुरुआत

दौड़ती-भागती जिंदगी थोड़ी थम सी जरूर गई है 
पर कहीं जिंदगी की नई शुरुआत भी हुई है ।

कुदरत का करिश्मा , प्रकृति के नियम 
सब के अपने मह्त्व समझ आने लगे हैं 
दूर होकर गुमसुम हो गए थे जो,
वो रिश्ते फिर मुस्कराने लगे हैं 
कुछ गलत हुआ तो कुछ अच्छी बात भी हुई है 
कहीं जिन्दगी की नई शुरुआत भी हुई है ।

नेकी और दरियादिली बन्द दरवाजों की कैद से
खुलकर बाहर आने लगे हैं 
सो रहे थे जिनके ज़मीर, वो भी 
इन्सानियत और मानवता का परचम लहराने लगे हैं 
देर से ही सही आदमी को अपनी पहचान हुई है 
कहीं जिंदगी की नई शुरुआत भी हुई है ।

ये वक़्त का तकाज़ा है जिसमें उलझे हैं हम सभी 
समय के साथ समझदारी से फिर सुलझने लगे हैं 
संयम और आत्मविश्वास के साथ दिलों में 
आशा के अखण्ड दीपक फिर जलने लगे हैं 
साहस और मजबूत इरादों की सदा जीत हुई है 
कहीं जिंदगी की नई शुरुआत भी  हुई है ।

इस वक़्त ने इन्सान को कई नित नई राह भी दिखाई है 
जीवन जीने की कई अद्भुत कला भी सिखाई है
हाँ ! लड़खड़ा गई थी जो जिंदगी,
फिर नए जज़्बे के साथ खड़ी हुई है 
और जिन्दगी की नई शुरुआत हुई है ।


अलका डांगी 









Friday, July 9, 2021

आस्था और विश्वास !

आस्था और विश्वास. !!

प्रभु भक्ति और श्रद्धा है साथ 
मन में भी है अटल विश्वास 
वो सुन रहे हैं सभी की प्रार्थना औऱ पूरी होगी एक दिन भक्तों की अरदास 
चाहे प्रलय हो या हो विकट परिस्थितियों का आभास 
हारकर छोड़ेंगे नहीं कोई भी प्रयास ।

इश्वर के दूत सदा खड़े हमारे आस-पास 
नित नए रूप बदल कर बढ़ा रहें मदद का हाथ 
जहाँ नेकी,  सच्चाई और करुणा का वास 
अदृश्य सही , महसूस हो जाता है उनके होने का एहसास 

चिंता और गम ना शाश्वत है, न कोई संकट अविनाश 
सच्ची आस्था ही हमारी ताकत है और यही हमारा विश्वास 
जिस दिन प्रभु - नाम से  जुड़ जाएगी हमारी हर एक श्वास 
चित्त प्रसन्न हो जाएगा,  मिल जाएगा आत्मिक - सुख में रास  


अलका डांगी 

Sunday, July 4, 2021

सोच बदल कर तो देखो !!

सोच बदल कर तो देखो 
नजरिया बदल जाएगा 

अपनी हर बात सही की जिद्द पकड़ कर अड़े रहते हो 
नई सोच, नए बदलाव पर आपत्ति दिखाकर 
न खुद बदलते हो, न बदलने देते हो 
एक बार तोड़ कर तो देखो अपने सोच की जंजीरों को  मन कितना हल्का हो जाएगा 
सोच बदल कर तो देखो 
नजरिया बदल जाएगा 

हर बात अपने तराजू में तोलते हो 
सही-गलत के दायरे में रखते हो 
परंपरा के नाम पर बदलने से ड़रते हो 
एक बार दिल से अपनाकर तो देखो समाज के हर परिवर्तन को 
जीवन कितना आसान हो जाएगा 
सोच बदल कर तो देखो 
नजरिया बदल जाएगा 

नई सोच को जब मिलतीं है हौसलों की उड़ान 
अस्तित्व में आता है तब कोई नवनिर्माण 
दुनिया की कई मुश्किलों को मिल जाता है समाधान 
एक बार विस्तृत होने तो दो अपने सोच के सीमित दायरे को 
भविष्य उज्ज्वल बन मुस्कुरायेगा 

सोच बदल कर तो देखो 
नजरिया बदल जाएगा 

अलका डांगी 





Wednesday, June 30, 2021

एक सलाम डॉक्टर के नाम!


एक सलाम डॉक्टर के नाम !


ये डॉक्टर भी बड़े कमाल होते हैं
कोई इन्हें समझे या ना समझे 
हर मर्ज समझने में ये बड़े बेमिसाल होते हैं
इनका अनुभव और इनका इलाज - 
हर स्वस्थ जीवन की ये ढाल होते हैं |

अपने फर्ज और सेवा में रहते हर वक़्त मगन
मरीज़ की सलामती और संतुष्टि से दूर हो जाती इनकी थकन
कभी अस्पताल ही बन जाता है इनका आशियाना 
यहीं इनके तीज-त्यौहार होते हैं 
मुश्किल घड़ी में फरिश्ते बन कर 
जरूरतमंद के लिए मददगार होते हैं |

कोई भी बीमारी हो या हो कोई महामारी 
बिना थके, बिना रुके, दिन - रात करते रहते तिमारदारी
कर्तव्यनिष्ठा से सराबोर होते हैं 
ये कर्मवीर भी तारीफ और सम्मान के पूरे हकदार होते हैं  |

परिवार से बढ़कर अपने फर्ज को अंजाम देते हैं 
आज दिल से इनकी कुर्बानी को चलो मिलकर सलाम देते हैं |

अलका डांगी 



Saturday, June 19, 2021

पिता!!

पिता की छवि जैसे आसमान में जगमगाता रवि
अटल, अविचल,अपनी हर किरण से जीवन में भर देते रंग कई 
ऊर्जा के स्त्रोत , जीवन ज्योत , जिम्मेदारी से ओतप्रोत  
सुरक्षा कवच बनकर हिफाजत करते परिवार के हर सदस्य की 

वो हौसला बढ़ाते , मार्ग दर्शक बन जाते कभी 
सहारा है जीवन की हर मुश्किल घड़ी में भी 
बच्चों का भविष्य उज्ज्वल करने में दाँव पर रख देते अपनी जिंदगी 
परिवार और बच्चों की खुशी से ही जुड़ी है उनकी सारी खुशी 

वो सख्त नजर आते हैं पर असल में होते नहीं 
हर कार्य सुचारू रूप से चलता रहे 
इसलिए बंद दरवाजे में रखते हैं अपने दुःख दर्द और भावनाओं को भी 
उनके चेहरे की झुर्रियां बयान कर देती है जीवन की थकान सभी 

वो जीवन दाता भी है , हमारी प्रेरणा भी 
उनसे ही जुडी है हमारी रोम-रोम और अस्तित्व की हर कड़ी 
दुख-दर्द और पीड़ाएं सब कम हो जाती है उनके होने के एहसास भर से ही 
उनकी छत्रछाया सुरक्षित रखती जीवन में आए धूपछाँव कितने भी 
उनकी ख़ुशी और मुस्कान कायम रखना 
इससे बड़ा और कोई फर्ज और कर्तव्य नहीं 
कि ऋण नहीं चुका सकते चाहे न्यौछावर कर दे उनपर जीवन की सारी  धन-संपत्ति 


अलका डांगी