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Friday, June 14, 2024

पति देव !!

आज कलम उठाई तो पतिदेव पर कविता बनाई... 😀 

उनपर भी कविता लिखूँ कभी
ये थी उनकी फर्माइश
पर वो तो स्वयं भगवान की अद्भुत रचना है 😀
ये तो उनको ही समझना है 
फिर भी उनके बारे में लिखकर करती हूँ पूरी उनकी ये ख्वाहिश 

सीधे - सरल (उतने भी नहीं 😉) 
हैं दिल के नेक 
नाम है जिनका विवेक 
हँसना, हंसाना, जिंदादिली है उनकी पहचान 
मस्ती मज़ाक से जुड़ी है उनकी हस्ती, बहुत विरले हैं उनके समान 

माता पिता उनके भगवान हैं 
पूरे परिवार में बसी है उनकी जान 
मित्रों के बिना अधूरा उनका जीवन 
इन सभी की खुशी में खुश रहता उनका मन 

मेहनत और लगन से अपनी पहचान आप बनाई 
परिवार और मित्रों में अपनी शान बढ़ाई 
देव, गुरु, धर्म में रखते श्रद्धा अपार 
जिनके आशीर्वाद से खुलते गए कामयाबी के हर द्वार 

आप सदा यूँ ही मुस्काते रहें 
सभी के जीवन में हँसी बिखराते रहें 
आपके जन्‍मदिन पर स्वस्थ और सफल जीवन की शुभकामना करते हैं 
खुशियाँ सदैव आपके कदम चूमें 
यही चाह रखते हैं... 🙏🙏😀

               ❤️अलका डाँगी❤️

Monday, April 8, 2024

स्वस्थ जीवन

स्वस्थ जीवन. !!

कभी intermittent तो कभी keto फास्टिंग 
कभी diet plan तो कभी calories counting
health के लिए सब कुछ apply और try करते हैं 
कभी protein  bar तो कभी protein powder 
विदेशी खाद्य पदार्थ और जीवन शैली 
healthy रहने के लिए superfood हमें आकर्षित करते हैं कभी सब कुछ आजमा कर भी हार जाते हैं 
तो कभी superfit and Healthy का खिताब हासिल करते हैं 
फिर भी खुश नहीं  , हर दिन weighing scale पर चढ़ते हैं 
लाखों advise देते हैं लाखों follow करते हैं 
और फिर भी anxiety और depression में जीते हैं 

पर स्वस्थ जीवन की यह भी एक पहचान  --

अपनी संस्कृति ,  मौसम और तासीर अनुकूल सादगी भरा खान-पान 
स्वयं से प्रेम और सभी का सम्मान 
सूर्य नमस्कार , योग , आसन और ध्यान 
समय पर सोना , समय पर उठना , नियमित चलना
व्रत उपवास करना ,  पाना धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान 
हँसना - मुस्कुराना , खुशियाँ लुटाना 
तन - मन में ताजगी भर जीवन बना देता आसान
स्वस्थ जीवन की होती यह भी एक पहचान 
हमारे यहां स्वस्थ रहने का अलग है अंदाज 
जिसे अपना रहे कई विदेशी भी आज 
पर हम भीड़ में कहीं खो गए हैं 
health के नाम पर अपनी विरासत से दूर हो गए हैं 
दादी नानी के नुस्खे किताबों में सीमित हो गए हैं 
healthy रहने के लिए अब ये भी try करना होगा 
अपना देश अपनी जीवन-शैली को फिर से दैनिक क्रम में शामिल करना होगा 
अपनी स्वस्थ जीवन-शैली से आने वाली पीढ़ी को भी प्रेरित करना होगा 

अलका डांगी 




Sunday, March 17, 2024

वोट. !!

वोट 

कहीं धर्म के नाम पर सियासत 
तो कहीं पार्टी बदलकर हुकूमत के लिए हो रही कवायद 
कहीं इतिहास के पन्ने पलटे जा रहे हैं 
कहीं आरोप प्रत्यारोप मढ़े जा रहे हैं 
सदियों पुरानी हरकतों पर  आज फिर सवाल किए जा रहे हैं 
ज़ख्म जो भर  चुके थे उन्हें कुरेद कर अपने स्वार्थ साधे जा रहे हैं 
वोट की राजनीति से है सभी को मतलब 
आखिर आम आदमी से किसीको क्या निस्बत 

कहीं पर तानाशाही और कूटनीति जैसी नागवार हरक़त 
और कहीं प्रचार - प्रसार और सोशल मीडिया के  प्रयोग से निरंतर पा रहे बरकत 
नजरअंदाज  करते करोड़ों लोगों की मुश्किलें अनेक 
पकड़ जब रखते हैं सिर्फ अपने  मतलब का मुद्दा एक 
खिलाफ़त की  भी कोई  कर नहीं सकता जुर्रत 
कि हुकूमत के लिए आपस में जुड़ जाती है कई सारी ताकत 

खैर इसका भी एक दिन होगा अंत जरूर 
टूट जाता है एक दिन झूठा अहम और गुरूर 
ये राजनीति है आज इधर तो कल उधर 
कुर्सी के नशे में है अभी सब चूर 
और किसी पर वफादारी का छा रहा सुरूर 
देशभक्ति का वास्ता देकर हो रहा हर कोई मगरूर 
कौन कितना पानी में ये तो आने वाला वक़्त बतायेगा 
बस हमारी स्वतंत्रता और आजादी पर आँच न आने पाए 
इसलिए सोच समझकर अपना कीमती वोट देकर जरूर आइएगा 

अलका डांगी 














 












Tuesday, February 20, 2024

सुखी और आदर्श परिवार. ??

सुखी और आदर्श परिवार  ??


कहते हैं परिवार तभी सुखी कहलाता है जब सब साथ मिलजुल कर रहते हैं और यह भी कहते हैं कि परिवार में आपसी नोक-झोंक और छोटे-मोटे झगड़े और मतभेद चलते रहते हैं इससे रिश्ते और मजबूत बनते हैं और किसी हद तक हम सब इस बात से सहमत भी हैं परंतु इसी बात का एक दूसरा पहलू भी है जब आदमी परिवार में रहकर भी अपना सुख चैन अपनी नींद और कार्य प्रभावित होता हुआ देखता है और दिन-रात दुखी और चिड़चिड़ा रहता है या गुमसुम और खोया रहता तब हमें इसका निवारण करने के लिए दूसरा पहलू भी जानना जरूरी हो जाता है |
लोगों का मानना है कि परिवार में सब अपने ही तो होते हैं तो भला कोई किसी का बुरा कैसे चाह सकता है या किसी का शोषण क्यों करेगा परंतु यह एक ऐसा कड़वा सच है जिसे समझने के लिए कोई तैयार बिरला ही होता है शोषण की शुरुआत कभी-कभी घर से भी होती है जिसे खुद परिवार वाले भी नहीं समझ पाते क्यूँ कि ये अनजाने भी हो सकता है या जानकर भी जिसे स्वीकार करना भी सबके लिए किसी चुनौती से  कम नहीं है  | कभी-कभी माता-पिता बच्चों और घरवालों के शोषण का शिकार होते हैं तो कभी-कभी बच्चे भी माता-पिता  और परिवार के अन्य सदस्यों के शोषण का शिकार हो सकते हैं | यह समाज की ऐसी कुरीति है जो देखकर भी सभी अनदेखा करते हैं और चुपचाप सहन करते चले जाते हैं |
एक सुखी परिवार आदर्श मिसाल हो सकता है और ऐसे बहुत परिवार भी होते हैं जो हमें प्रभावित करते हैं परंतु सभी परिवार आदर्श की मिसाल नहीं हो सकते और इस बात को भी स्वीकार  करना चाहिए | ऐसे भी परिवार होते हैं जहाँ पति  - पत्नी में या माता-पिता भाई-बहन या भाई-भाई और बेटों बेटियों में आपसी कलह होते रहते हैं  यहाँ तक कि मार पीट और मानसिक शोषण भी होते हैं पर फिर भी साथ रहते हैं जिसकी वज़ह बहुत  हद  तक सामाजिक और आर्थिक   ही हो सकती है | 
बहुत  से परिवार संयुक्त जब रहते हैं और  नए रिश्ते और संबंध जुड़ते हैं तब  भी घर के  मौजूदा सदस्यों तथा नए सदस्यों का आपस में व्यवहार और आचरण ही परिवार की खुशी का मापदंड तय करता है | जब एक दूसरे को दिल से अपना नहीं सकते और राजनीति कूटनीति और नियमित कलह होते हैं तब परिवार के संवेदनशील और भावुक व्यक्ती सबसे ज्यादा सहन करते हैं और पीड़ित होते हैं और इसका शिकार होते हैं | और इसी वज़ह से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है | फिर भी हमारा भारतीय समाज तथाकथित संस्कारों का वास्ता देता है और परिवार वाले भी अपने से ज्यादा समाज और लोगों के भय से सब कुछ चुपचाप सहन करते हुए अच्छे परिवार का चित्र या परिकल्पना करते है जो कि एक स्वस्थ समाज और परिवार के सदस्यों के लिए पूरी तरह से नुकसान देह है |
समय रहते परिवार वाले स्वयं अपने निजी फैसले बिना किसी सामाजिक दबाव के सबके हित के लिए कर सर्वसम्मति और समझदारी दिखाएँ यही बडप्पन होता है चाहे किन्हीं वजहों से परिवार से अलग करना या रहना पड़े  परंतु रोज-रोज के कलह क्लेश और मानसिक प्रताड़ना से बच सके और अपना जीवन स्वाभिमान और शांति से गुज़ार सके इसमें ही सबका हित निहित है सिर्फ लोगों को दिखाने के लिए आदर्श परिवार का वास्ता देकर जबरन साथ रहना और सहनशक्ति को दाँव पर रखना कहाँ की समझदारी है. ?
दूर रहकर  भी खुशी से परिवार के सुख-दुःख में साथ खड़ा रहना  , जरूरत पड़ने पर बिना कहे , समझ कर एक दूसरे की मदद करना क्या आदर्श मिसाल नहीं है क्या दूर रहने से परिवार वालों का प्रेम कम हो जाता है या वो एक परिवार नहीं कहलाता  ?  रोज - रोज परिवार की राजनीति और क्लेश कलह से अपना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तथा सुख शांति के साथ समझौता करने से बेहतर है दूर रहकर भी परिवार वालों के बीच प्रेम और अपनापन बना रहे और सभी चैन और सुकून की जिंदगी जी सकें |


अलका डांगी 

Thursday, February 15, 2024

जरूरी है !!

आत्मविश्वास जरूरी है 
कार्य सिद्ध करने के लिए 
आंधी तूफान से उबरने के लिए 
आशा और विश्वास की नींव मजबूत करने के लिए

बदलाव जरूरी है 
समाज और परिवार के हित के लिए 
प्रगति और उन्नति के लिए
शांत चित्त और समकित के  लिए 

चलते रहना जरूरी है 
स्वस्थ और निरोगी शरीर के लिए 
स्वावलंबी जीवन के सफर के लिए 
तय मंजिल हासिल करने की डगर के लिए 

शौक होना जरूरी है 
अपना कौशल सँवारने के लिए 
हर पहलू का दृष्टिकोण अपनाने के लिए 
आस्था और मनोबल बढ़ाने के लिए 

दोस्तों और परिवार का साथ जरूरी है 
प्रेम और अपनेपन की ताकत समझने के लिए 
हर हालात से निपटने के लिए 
गिर कर फिर संभलने के लिए 

मुस्कुराना जरूरी है 
सकारात्मक आभामंडल के लिए 
मुश्किल परिस्थितियों में संबल के लिए
प्रसन्नचित्त और प्रफुल्लित अंतर्मन के लिए 


अलका डांगी 
 






Thursday, February 8, 2024

मेरा गाँव

मेरा गाँव आज भी उतना ही हसीन दिखता है 
बेचैन मन को चैन और सुकून का जीवन देता है 

खेत-खलिहान की हरियाली से 
सुबह की लाली और ढलती शाम मतवाली से 
शुद्ध हवा में साँस लेता है 
मेरा गाँव आज भी बेपरवाह होकर जीवन जीता है 
बेचैन मन को चैन और सुकून का जीवन देता है 

चरवाहों के संग चलते भेड़ बकरियों की कतारों से 
पशु पक्षियों की मधुर पुकारों से 
नीम और पीपल के छांव के किनारों से 
पर्वतों और पहाडियों के बीच आशियाना सजता है 
मेरा गाँव आज भी खुले आसमान में अंगड़ाई लेता है 
बेचैन मन को चैन और सुकून का जीवन देता है 

सिर पर छलकता हुआ पानी का घड़ा लेकर चलती मस्त चालों से 
नुक्कड़ पर  लगते गरमागरम चाय के ठेलों से 
सड़कों पर बेफिक्र खेलते बच्चों और बुजुर्गों के आपसी मेलों से 
अपनेपन और सादगी के साथ सरलता से 
मेरा गाँव आज भी इन्सानियत और जिन्दादिली की मिसाल कायम करता है 
बेचैन मन को चैन और सुकून का जीवन देता है 

नदी में बहते चंचल पानी के बहाव से 
तालाब के पानी के ठहराव से 
सादी साग रोटी  के हर निवाले में गाँव की मिट्टी के स्वाद से
हर आत्मा संतृप्त करता है 
मेरा गाँव आज भी मंद गति से चलकर भी खुश रहता है 
बेचैन मन को चैन और सुकून का जीवन देता है 

अलका डांगी 








Thursday, August 31, 2023

मनोरोग !

चिंता , अवसाद या घबराहट 
कहाँ करते है अपने आने की आहट
धीमे-धीमे, कमजोर कर मन 
जाने कब छीन लेते है 
जीवन से चैन, सुकून और मुस्कुराहट 

समय की भी है यह कैसी करवट 
अपनी ही भावनाओं के घेरे में आदमी जाता भटक 
कभी अकेलेपन का एहसास कभी नकारात्मक विचारों का जमघट 
कभी तनहाई और लाचारी में रह जाता अपने आप में सिमट 

हर पल बैचैनी और समय के इस चक्र से बाहर निकलने की छटपटाहट 
ढूँढता हैं  मन अंधेरे में रोशनी की एक किरण की झगमगाहट 
किसी अपने का  निरंतर साथ और प्रेम की चाहत 
जहाँ ना हो कोई सवालों का घेरा न सलाह मशविरे की हरक़त
मजबूत सहारा बनकर अटल अविचल खड़ा रहे जैसे कोई पर्बत 
समय के साथ हर तूफान से जूझ कर बाहर निकलने की मिल जाएगी तब हिम्मत 

वक़्त लेगा फिर एक दिन करवट
चाहे परिस्थिति हो कितनी भी विकट 
हारकर नहीं जीतकर रख देंगे हर बाजी पलट 
आदमी स्वीकार जब करेगा मनोरोग को बेझिझक 
अंतर्मन की शक्ति बहाल कर ,  लेगा हर स्थिति से भी एक दिन निपट 
लौट आएँगी खुशियाँ निरस जीवन में 
संग अपने लेकर फिर से चैन सुकून और मुस्कराहट  !!

अलका डांगी