दाम्पत्य जीवन !!
बेशक अपनी मर्जी के मालिक हैं तुम हम स्वतंत्रता और आधुनिकता का हर वक्त भरते रहते हैं दम
पर दाम्पत्य जीवन की सफलता में साथ चलना पड़ता है मिलाकर कदम से कदम
ना अभिमान की जगह यहाँ पर
ना स्वाभिमान को रखना दाँव पर
एक दूसरे के व्यक्तित्व का सम्मान ही
हर दिन देता है प्रेम को जन्म
ना पूर्वाग्रह मन में बसा कर
ना अपने आग्रह को जिताकर
सरलता और सहजता से ही
ये रिश्ता सँवरता है हरदम
ना आरोप प्रत्यारोप लगा कर
ना भेदभाव और कमियाँ जताकर
परिवार में संतुलन बनाकर ही
जीत सकते हैं दिलों को हम
पैतृक सत्ता और नारीवादी की दुहाई देकर
फर्ज और कर्तव्य से मुँह मोड़कर
ये कोई खेल नहीं की तुम जीतो या हम
आखिर हार तो रिश्तों की ही होगी
अगर साथ मिलकर ना सुलझा सके हम अपने अहम
कुछ तुम समझो कुछ समझे हम
एक खूबसूरत रिश्ता बन सकता है
बस चाहिए साथ मुझको तुम्हारा और तुमको हमारा
जीवन में चाहे कितने उतार चढाव आए या आए खुशियाँ और गम
अलका डांगी