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Friday, August 15, 2025

आजादी !

आजादी !

यह आजादी कहाँ इतनी आसान थी 
देश भक्तों और शूरवीरों का बहुत मुश्किल भरा इम्तिहान थी यह आजादी कहाँ इतनी आसान थी 
बरसों तक सरजमीं इस गूँज के लिए परेशान थी 
यह आजादी कहाँ इतनी आसान थी 

मातृ-भक्तों ने भारत माँ को सर्वोपरि चुना 
धन्य वो माताएँ जिन्होंने उन सबको जना 
जिनके रक्त के कण-कण में स्वतंत्रता और आजाद देश का बसा था सपना 
जीने-मरने की सुध कहाँ - ये लड़ाई तो देश के स्वाभिमान और सम्मान की थी 
ये आजादी कहाँ इतनी आसान थी
 
अंग्रेजों और मुगलों की हुकूमत को नेस्तनाबूद करना 
शोषण और अत्याचार की जंजीरों से देश वासियों को मुक्त करना 
अपनी संस्कृति और धरोहर की रक्षा करना 
उन वीरों के व्यक्तित्व की यही पहचान थी 
ये आजादी कहाँ इतनी आसान थी 

भारत माता की स्वतंत्रता देश भक्तों और वीरों का बलिदान थी 
यह व्यर्थ न जाए - बात है अब हम सबके भविष्य और कल्याण  की 
भारत की सभ्यता और अनमोल विरासत की पूँजी अब हाथ में है हर नौजवान की 
आजादी  , आजादी और आजादी. !! यह लड़ाई है  स्वतंत्रता स्वाधीनता और अधिकार की  
धरती पर हर इन्सान की 
सबके आत्मसम्मान की 

अलका डांगी 

Thursday, August 7, 2025

अपने पूर्वाग्रह और मापदंड !!


अपने पूर्वाग्रह और मापदंड   !

मुंबई की है -  
तो तेज तर्राट होगी 
बातें भी उसकी बेबाक होगी 
fashion का अलग ही अंदाज होगा 
disco pub में भी उसका राज होगा 
खाना तो बाहर का ही खाती होगी !
अव्वल तो खाना बनाती भी होगी ??
परिवार की क्या कदर होगी ?
संस्कारों से क्या भद्र होगी. ?

यह सोच है अधिकतर बाहर वालों की 
तो उन सबके लिए 
हाँ  हम मुंबई से हैं 
पर अपने काम से काम रखते हैं 
ना किसी से बेवजह उलझते हैं ना दखल अंदाज करते हैं कपड़ों से मॉडर्न होने का ना दावा करते हैं 
ना ही अपनी रहनी करनी पर अकड़ते हैं 
आधुनिकता हमारे विचारों में झलकती है 
सादगी हमारे दिलों दिमाग में बसती है 
हम समय के साथ चलते हैं स्वतंत्रता की मर्यादा भी समझते हैं
और हाँ ये कोई justification नहीं है ना ही सिर्फ mumbai की बात है 
ये ऐसा torture है जिससे हर क्षेत्र में किसी न किसी को गुजरना पड़ता है 
दूसरों के मापदंड और  पूर्वाग्रह से बहुत जुझना पड़ता है 
तो किसी को आँकने से पहले उसके जीवन को जी लो
या उनकी जिंदगी और तौर-तरीकों को पहले समझ लो 
ना कि किसी की राह में बाधा बनकर उसकी प्रगति को छीन लो 
ना संस्कारों का वास्ता देकर किसी को हीन गिन लो 
सब इन्सान है इन्सानियत को ही समझ लो 
बस जीवन सुन्दर बन जाएगा  थोड़ा मन सरल कर लो 

अलका डांगी 




 

Thursday, July 31, 2025

दाम्पत्य जीवन


दाम्पत्य जीवन  !!
बेशक अपनी मर्जी के मालिक हैं तुम हम 
स्वतंत्रता और आधुनिकता का हर वक्त भरते रहते हैं दम 
पर दाम्पत्य जीवन की सफलता में साथ चलना पड़ता है मिलाकर कदम से कदम
ना अभिमान की जगह यहाँ पर 
ना स्वाभिमान को रखना दाँव पर 
एक दूसरे के व्यक्तित्व का सम्मान ही 
हर दिन देता है प्रेम को जन्म 
ना पूर्वाग्रह मन में बसा कर 
ना  अपने आग्रह को जिताकर 
सरलता और सहजता से ही 
ये रिश्ता सँवरता है हरदम 
ना आरोप प्रत्यारोप लगा कर 
ना भेदभाव और कमियाँ जताकर 
परिवार में संतुलन बनाकर ही
जीत सकते हैं दिलों को हम 
पैतृक सत्ता और नारीवादी की दुहाई देकर 
फर्ज और कर्तव्य से मुँह मोड़कर 
ये कोई खेल नहीं की तुम जीतो या हम 
आखिर हार तो रिश्तों की ही होगी 
अगर साथ मिलकर ना सुलझा सके हम अपने अहम
कुछ तुम समझो कुछ समझे हम 
एक खूबसूरत रिश्ता बन सकता है 
बस चाहिए साथ मुझको तुम्हारा और तुमको हमारा 
जीवन में चाहे कितने उतार चढाव आए या आए खुशियाँ और गम 

अलका डांगी 







Sunday, July 13, 2025

खास शख्स

मुश्किल वक्त में ऐसा कोई शख्स खास होता है 
जो कि सदा हमारे आसपास होता है 
सोई उम्मीद जग जाती है  
खोई हुई मुस्कुराहट लौट आती है 
जब जब उसके होने का एहसास होता है 
मुश्किल वक्त में ऐसा कोई शख्स खास होता है 
वह हिम्मत बन कर आता है 
आस भरी दवा दे जाता है 
खुशनुमा माहौल कर जाता है 
जब जब मन उदास होता है 
मुश्किल वक्त में ऐसा कोई शख्स खास होता है
निस्वार्थ सेवा और समर्पण सा मित्र होता है 
प्रेम और करुणा से भरा हुआ अद्भुत चित्र होता है
प्रशंसा और श्रेय से कोसों दूर होता है
मानवता से सराबोर , और नहीं कोई उसे सरोकार होता है 
मदद करने के लिए तत्पर बस हर वक्त यही प्रयास होता है 
मुश्किल वक्त में ऐसा कोई शख्स खास होता है |

अलका डांगी 


Wednesday, June 18, 2025

मेरा शहर !

मेरा शहर  !

मेरे शहर का यह कैसा विकास हो रहा है 
ऊंची-ऊंची इमारतों का निर्माण आसपास हो रहा है 
आम आदमी खुली सड़क और खुले मैदान खोज रहा है
हर गली हर नाके पर सिर्फ शोर हो रहा है 
सिर्फ बाहर ही नहीं अब अंतर्मन भी अशान्त हो रहा है 
मेरे शहर का यह कैसा विकास हो रहा है 

यातायात की सुविधा के लिए मेट्रो के फेज बन रहे हैं 
ट्रैफिक से उबरने के लिए ब्रिज पर ब्रिज चढ़ रहे हैं
सुविधा के लिए हर कोई अपनी मुमकिन कोशिश कर रहा है 
फिर भी भीड़ पर नियंत्रण खो रहा है  
मेरे शहर का यह कैसा विकास हो रहा है 

बरसों पुराने हरे-भरे पेड़ कट रहे हैं 
सागर का तट भी कहीं खो रहा है 
आधुनिकता और विज्ञान का चमत्कार हो रहा है 
फिर भी हर कोई धैर्य और संयम की परीक्षा दे रहा है 
मेरे शहर का यह कैसा विकास हो रहा है 

प्रदूषण का स्तर ऊँचाई छू रहा है 
पशु पक्षियों का आवागमन कम हो रहा है 
प्रकृति के साथ नित्य नया खिलवाड़ हो रहा है 
फिर भी ये शहर हँसते हँसते-हँसते बढ़ती जनसंख्या का बोझ ढ़ो रहा है 
मेरे शहर का यह कैसा विकास हो रहा है

अलका डांगी 

Tuesday, April 15, 2025

दीदी कहूँ या छोटी माँ चाहिए कहना 
परिवार का हो तुम ऐसा अमूल्य गहना 
छोटी उम्र बड़ी जिम्मेदारियाँ 
कैसे निभाती गई तुम हमेशा बहना 

सहनशीलता की मूर्त बनकर 
हर चुनौती को मात देकर 
सुख-दुख में अपनों की ढाल बनकर 
सदा अटल खड़ी थी तुम बहना 

सरल मन सीधी बात 
ईमानदारी और सच्चाई का चोला सदा पहना 
अपनी महत्वाकांक्षा और सपने छोड़ 
निःस्वार्थ भाव से कैसे परिवार में तुम ढलती गई बहना 

चिंता और परवाह सब की बराबर 
मन में सबके लिए दया और करुणा 
धर्म और आध्यात्मिक जीवन अपनाकर 
कैसे तप त्याग में समर्पित होती गई तुम बहना 

तुम्हारे पुण्योदय का फूल खिला है 
वर्षीतप का आभूषण जो तुमने झेला 
हर्ष उल्लास की  ये मंगल बेला 
पूरे परिवार का तुम्हारे आँगन में लगा है जैसे मेला
तुम्हारे त्याग और समर्पण की देन कहें इसे 
या भगवान का आशिर्वाद है ये बहना 

हम सब की दुआओं में सदैव रहना 
खुशियाँ कदम चूमे सारे जहाँ की 
हँसता मुस्कराता फलता-फूलता रहे तुम्हारा घर अंगना 
चाहे तप करो या कोई भी कार्य 
प्रगति पथ पर हमेशा आगे बढ़ते रहना 
ओ बहना दीदी कहूँ या छोटी माँ चाहिए कहना 
अपना प्रेम सब पर यूँ ही बनाए रखना 

अलका डांगी 




 



Thursday, April 10, 2025

मेरे  प्रभु महावीर  !

मेरे तन-मन में बसे महावीर 
मेरे रग-रग में  बसे महावीर 
सच्चे धर्म की राह दिखाने वाले 
आत्मा की पहचान कराने वाले 
उपकारी प्रभु के ऋणी हैं 
जिनने प्रकाश देकर दूर किया तिमिर 
अहिंसा का प्रचार बढ़ाने वाले
अनेकांतवाद का रहस्य समझाने वाले
केवलज्ञानी प्रभु ने ज्ञान कराया
कि आत्मा शास्वत और नश्वर है शरीर
अब उनकी वाणी को आत्मसात करना है 
परमात्मा का दर्शन साक्षात करना है 
तन-मन-धन से प्रभु भक्ति में होकर तल्लीन 
धर के संयम और धीर 
मेरे तन-मन में बसे महावीर 
मेरे रग-रग में बसे महावीर 

अलका डांगी