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Tuesday, April 23, 2019

फुर्सत के पल

वो चाय की चुस्की और दोस्तों का साथ
हँसी, ठहाके और गपशप की क्या बात
दिल खोल कर रख देते हैं
ऐसे फुर्सत के पल रोज कहाँ मिलते है
चलो उस पल को फिर जिंदा करते हैँ

आओ एक बार फिर चाय पर मिलते हैं 

इज्जत, शौहरत खूब कमाई
पैसों से भी की खूब सगाई
अब दोस्तों के साथ चंद लम्हों के लिए तरसते हैं
चलो उस पल को फिर जिंदा करते हैं

आओ एक बार फिर चाय पर मिलते हैं 

संसार की माया जाल में उलझे रहे
कुछ शब्द रह गए कहे-अनकहे
दोस्तों के सिवाए उन्हे कौन समझते हैं
चलो उस पल को फिर जिंदा करते हैं

आओ एक बार फिर चाय पर मिलते हैं 

उम्र की दराज पर जब आकर बैठते हैं
एक दूसरे का दर्द कहते और सुनते हैं
सुकून और राहत की साँस तब लेते हैं
ऐसे फुर्सत के पल रोज कहाँ मिलते हैं
चलो उस पल को फिर जिंदा करते हैं 

आओ एक बार फिर चाय पर मिलते हैं 

अलका डांगी 

Monday, April 15, 2019

मतदान

एक बार फिर मतदान होना है
जनता ने अपने नए मंत्री को चुनना है
वैसे तो ये क्रम सदियों से चला आ रहा है
शायद जनता को भी वोट देने में मजा आ रहा है
सबके मन में एक नयी उमंग है
क्यूँ न हो, नए मंत्री को चुनने की जो जंग है
नयी पार्टी, नए उम्मीदवार, साथ ही कुछ नए वादे भी
प्रजा को खुश करने और देश की उन्नति के इरादे भी
कौन सही है कौन गलत ये तो वक्त ही बताएगा
परंतु इस वक्त वोट किसे दिया जाये प्रश्न ये सताएगा
उम्मीद है कोई व्यक्ति ऐसा चुन लिया जाएगा
जो देश को हर आने वाले संकट से बचा पाएगा
अब तो इस देश को संभालनेवाले की जरूरत है
भारत माँ को एक रखवाले की जरूरत है

अलका डांगी

Thursday, April 11, 2019

योग




योग  !

सदियों पुरानी संस्कृति है योग
भारत का अभिन्न अंग और कृति है योग
सारी दुनिया पर हो रहा हावी
शारीरिक मानसिक संतुलन की है ये चाबी
योग के प्रकार अनेक
पर सभी का मकसद है एक
आसन करो या प्राणायम
थकान दूर कर, देता आराम
श्वाछोश्वाश का है ये खेल इसका नहीं कोई मेल
बच्चें, बड़े सभी इसे अपनाएं
स्वस्थ तन-मन, निरोगी काया पाएँ

अलका डांगी

Wednesday, April 10, 2019

भाषा का स्वभाव

अभिव्यक्ति का माध्यम है
स्वभाव की परिभाषा
अपना अपना अंदाज है
सबकी अपनी अपनी भाषा
संबंधों को मधुर बनाती
कभी स्वजनों से दूर कराती
व्यंग्य कटाक्ष से ठेस पहुँचाती
हास्य से चेहरों पर मुस्कान बिखराती
हर पल अपना अलग रंग दिखलाती
चंचल चतुर और चालाक भी है भाषा
सीधी, सरल जल्द समझ आती
गोल गोल माया का जाल बनाती
कभी रिश्ते बनाती
कभी चक्रव्यूह में है उलझाती
मगर प्रेम और सत्य से ईश्वर के करीब ले जाती है भाषा
और सबसे मासूम एवं निर्दोष होती है
बच्चों के कोमल मन की भाषा
न माप तौल कर बोली जाती
ना ही किसी का दिल दुखाती
सबके मन को लुभाती
इतनी प्यारी हो सबकी भाषा
विनय विवेक और मिठास से जुड़ी रहे
ना रहे कोई आशा और निराशा
अपना अपना अंदाज
अपनी अपनी भाषा

अलका डांगी 

Sunday, April 7, 2019

श्रद्धांजलि

एक नन्ही सी जान थी वो
माता पिता की शान थी वो
मन में बड़े अरमान और सपने थे
उस मासूम के लिए तो सभी अपने ही थे
मायके से विदा हुई थी नयी दुनिया बसाने
नयी उमंग नए विश्वास के साथ हंसने हँसाने
पर जिन्हे अपना समझा था
वो तो निकले बेगाने
किसी से बयान न कर सकी अपने  दुख भरे अफसाने
समाज की कुरीतियों के जाल में फँस गयी
एक हसीन चुलबुली बेटी अपने ही ससुराल की बलि चढ़ गयी
हमारी बेटी की कमी तो कभी पूरी न हो पाएगी
पर ऐसे निर्दयी बेरहम इंसानों को ये दुनिया जरूर सबक सिखायेगी

विनीता को समर्पित 🙏

अलका डांगी

गैजेटस और मासूम बचपन

गुमसुम से बैठे हैं बच्चे हमारे
गैजेटस की दुनिया में कौन इन्हे पुकारे
खिलौने तो है ढेर सारे
पर कब तक खेले इनके सहारे
मित्र, सहेली सब कहा खो गई
मोबाइल और लैपटॉप ही अब उनकी दुनिया हो गई
वो पकडा पकड़ी, छुपाछुपी और लगोरी
और वो रस्सीखींच की जोरा - जोरी
कोई आज इन्हे ये सब भी सिखाए
टीवी मोबाइल से कहीं दूर ले जाए
हकीकत और भ्रम का फर्क इन्हें समझाएँ
कहीं गैजेटस की दुनिया में ये अपना मासूम बचपन न खो जाएँ 

अलका डांगी