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Friday, September 11, 2020

अनजाना मर्ज

अपने मापदंड और पूर्वाग्रहों से उसे मत आँकीए
उसकी मनःस्थिति समझने की कोशिश तो कीजिए
सलाह - मशवरा नहीं, उसे प्यार और हौसला दीजिए
वह टूट कर बिखर जाए उससे पहले उसे सम्भाल लीजिए 

न वह तन से बीमार है न मन से 
गुट रहा है वह हर पल अवसाद के अकेलेपन से 
सब साथ है फिर भी नहीं जानता क्यूँ 
घिरा हुआ है चिंता, घबराहट और खालीपन से
समझते हुए भी बेबस है और मजबूर है 
इस अनजाने मर्ज के भँवर की जकड़न से 

इस वक़्त अपना साथ दीजिए और उसका विश्वास जीतीए 
इस भँवर से बाहर निकालने में उसे हिम्मत दीजिए 
ये वक़्त भी गुजर जाएगा बस उसका हाथ थाम लीजिए 
हँसते मुस्कुराते हुए उसकी सुनी बगिया गुलजार कीजिए
टूटे - बिखरे हुए मन को जोड़कर फिर से उसका जीवन सँवार दीजिए 


अलका डांगी 



Thursday, September 10, 2020

क्या ज़रूरी है !!

क्या यहाँ काम करके जताना जरूरी है ! 
कुछ करो या न भी करो पर करने का दिखावा जरूरी है! 
दूसरों के काम को अपना बताकर 
श्रेय खुद ले जाना जरूरी है ! 
और इसी क्रम में दूसरों को नीचा दिखाकर
अपना सिक्का जमाना जरूरी है ! 

क्या यहाँ झूठी चाहत और अपनापन दिखाना जरूरी है ! 
सच्चे दिल से हो न हो पर एहसास दिलाना जरूरी है ! 
भीतर नफरत और कड़वाहट भरी है ! 
फिर भी प्रेम का नकाब चढ़ाना जरूरी है.! 

क्या यहाँ समाज के हर रीति रिवाज निभाना जरूरी है ! 
सही हो या गलत पर आडंबर अपनाना जरूरी है ! 
विद्रोह की आवाज उठे अगर तो 
संस्कारों की दुहाई देकर उसे दबाना जरूरी है ! 

नहीं.... 
क्यूँकी यहाँ ऐसे लोग भी हैं जो 

दो रूप  नहीं धारण करते हैं 
जैसा मन है वैसा ही आचरण करते हैं 
गलती हो तो निःसंकोच स्वीकार करते हैं 
न किसीकी राह में रुकावट बनते हैं 
न मन में छल कपट की भावना रखते हैं 
भीड़ में न चलकर अपनी राह खुद तय करते हैं 

क्यूँ कि यहाँ सरल और निर्मल मन होना जरूरी है 
बाह्य और अंतर्मन एक होना जरूरी है 
जीवन सिर्फ जीना ही नहीं सफल और सार्थक बनाना जरूरी है 
और इंसान के मन में इन्सानियत होना जरूरी है 

अलका डांगी 










Thursday, August 6, 2020

शिक्षण - साक्षरता, मानसिकता, आचरण

शिक्षण  से समाज की प्रगति निश्चित है....,. 
घर-परिवार हो या व्यापार, शिक्षित व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी और समझदारी से अपना योगदान देते हुए उन्नति और प्रगति की ओर सदा बढ़ते रहते हैं
परन्तु शिक्षित होने का मतलब क्या होता है? सही मायने में शिक्षित किसे कहते हैं? 

क्या बड़ी बड़ी डिग्रीयाँ हासिल करने से कोई सही मायने में शिक्षित कहलाता है या जीवन में अपनी क्षमता और सामर्थ्य अनुसार शिक्षण हासिल करके आगे बढ़ना सही शिक्षण कहलाता है या फिर वह जिसने साक्षरता का ' क ख ग'  भी नहीं पढ़ा हो किन्तु ईमानदारी और अनुशासन से जीवन की शिक्षा से अपना लक्ष्य हासिल किया हो और दूसरों के लिए मिसाल खड़ी की हो, क्या वह शिक्षण कहलाता है  ? 

इन तीनों पक्षों का अपना अपना अलग नजरिया है - 
सबसे पहले हम उन शिक्षित व्यक्तियों की बात करते हैं जो बड़ी बड़ी डिग्रीयाँ  प्राप्त कर अपनी काबिलियत से अपना अलग मकाम हासिल करते हैं ये जीवन मे खूब तरक्की करते हैं, इज़्ज़त और शौहरत हासिल करते हैं 
अपने देश और परिवार का नाम रोशन करते हैं | इनमें बहुत व्यक्तियों के योगदान से समाज की प्रगति हुई है परंतु कुछ ऐसे भी व्यक्ति हैं जो किसी खास वज़ह - जैसे सफ़लता के गुमान में अपना ज़मीर खो देते हैं और पद प्रतिष्ठा के अहंकार में गलत राह अपना लेते हैं, या कुछ समाज की अपेक्षाओं में खरा न उतर पाने पर हीनता और अवसाद का शिकार हो जाते हैं और कुछ अपनी शिक्षा और क़ाबिलियत का दुरूपयोग कर समाज की प्रगति में रुकावट पैदा करते हैं जैसे अपनी हीन मानसिकता, बेईमानी, भ्रष्टाचार और शोषण चाहे वो निम्न वर्ग का हो या स्त्रियों का  इस्तेमाल कर शिक्षा का अपमान करते हैं |

अब हम उस श्रेणी की बात करते हैं जिसमें व्यक्ति अपनी किसी पारिवारिक मजबूरी या आर्थिक स्थिति के कारण शिक्षा पूरी नहीं कर पाते हैं और बीच में ही छोड़ने के लिए विवश हो जाते हैं इनमें भी दो तरह के लोग पाए जाते हैं पहले वो लोग जो इसे दिल से अपना लेते हैं जो अपने परिवार के काम काज या कोई साधारण नौकरी पाकर संतुष्ट हो जाते हैं और उसी में आगे आगे तरक्की करते जाते हैं और दूसरे वो जो अपने सपने अधूरे होने के कारण या तो बागी बन जाते हैं और गलत काम करके आगे बढ़ते हैं या वो भी जो अपने सपने पूरे नहीं होने पर अपने बच्चों का भविष्य उज्जवल करने के लिए दिन रात मेहनत कर उन्हें आगे बढ़ाते हैं इनमें भी जो रूढ़िवादी या परंपरावादी होते हैं वे समय के साथ नहीं बदलते तो उनकी आने वाली पीढ़ी ही क्रांति और बदलाव लाती है 
इस वर्ग में भी बहुत से लोग बेईमानी भ्रष्टाचार और हुकुमत करने के लिए अपनी मनमानी चलाते हैं तथा समाज की प्रगति में बाधा उत्पन्न करते हैं |

अब एक वर्ग ऐसा भी जो साक्षर नहीं है तथा मजबूर होकर निम्न वर्ग के कार्य करते हैं या परिवार के साथ खेत खलिहान संभालते है या उनके पहले से चली आ रही काम काज की पद्धति अपनाते हैं  इस वर्ग के व्यक्ती अधिकतर सीधे सरल होते हैं तथा अपने काम को नीति पूर्वक करके खुश रहते हैं ये शिक्षित न होते हुए भी समाज से शिक्षा हासिल करते हैं तथा दिन रात मेहनत कर अपने आने वाली पीढ़ी को शिक्षित करने तथा समाज की प्रगति के लिए अनवरत प्रयास करते रहते हैं 
ये समाज के शोषण का शिकार अधिक होते हैं तथा अपनी अज्ञान और परंपराओं से बाहर निकलने के लिए शिक्षण का सहारा लेते हैं और अपनी मानसिकता को समय के साथ बदलने की चाहत भी रखते है |

इन सभी वर्गों का अलग अलग नजरिया होता है  व्यक्ती की मानसिकता भी भिन्न भिन्न होती है |
पर कुल मिलाकर आदमी किसी भी वर्ग का क्यूँ न हो सही शिक्षण वहीं होता है जो समय के साथ समाज में बदलाव के साथ ही समाज की प्रगति में अपना योगदान करता है अपनी मानसिकता खुले विचारों वाली रखता है ऊँच नीच भेद भाव से परे होता है  निम्न वर्ग और नारी का शोषण जहाँ नहीं होता है सभी को आगे बढ़ने देता है अपनी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करते हुए दूसरों की भी उतनी ही इज़्ज़त कर्ता है क्यूँ कि शिक्षा सिर्फ साक्षरता से ही नहीं मानसिकता और आचरण से भी जुड़ी हुई है जो एक अच्छे और प्रगति करते हुए समाज की नीव है |


अलका डांगी 





Saturday, July 11, 2020

रिश्ते की गरिमा

वो कहते हैं कि हम किसी का दिल नहीं रखते
पर वो कहाँ अब तक हमारे दिल को समझते 
माना कि वो बड़े दिल वाले हैं पर रिश्ते तो हमने भी बखूबी संभाले हैं
वो रिश्ते निभाने के लिए अपनों को दाँव पर रखते हैं 
हम अपनों और रिश्तों की मर्यादा के भँवर में फंसते हैं 
उनका तरीका अलग है, हमे मंजूर है 
पर हम भी कभी अपने तरीके से जी लेते हैं तो इसमें हमारा क्या कसूर है.?
उन्होंने अपने रिश्तों - नातों को निभाकर खूब नाम कमाया 
पर हमने जब भी चाहा सदा उन्हें दूर पाया 
वो हर वक़्त गलत है ऐसा भी हम नहीं कहते 
न उनसे बड़ा बनने की चाहत ही रखते 
पर रिश्ते - नाते निभाते निभाते 
काश  हमारे रिश्ते की गरिमा वो भी कभी समझते 

अलका डांगी 



Thursday, July 9, 2020

एक सलाम कर्मवीर के नाम

आँसू भर आए इन आँखों में
जब धन्यवाद की गूँज थी हर झरोखों में
कर्मवीरो की कर्तव्यनिष्ठा को करते हम सभी सलाम है
 जान हथेली पर रख कर एकजुट करते ये जब अपने काम है 

इनका भी तो कोई परिवार है
फिर भी हर वक़्त सेवा में रहते ये तैयार है
अपने कर्म के प्रति सदा जिम्मेदार है 
इनकी जितनी हौसला अफजाई की जाए उतनी ही कम है
ये सभी आम इंसान सही पर कुछ खास है 
इनसे ही सुरक्षित हर ज़नजीवन हर श्वास है 🙏🙏

अलका डांगी

Tuesday, July 7, 2020

इस बार....

वो सोंधी खुशबु जो आती है पहली बारिश के साथ
वो पहली बारिश जिसमें भीगने की रहती है आस 
इस बार बुझी नहीं वो प्यास 
इस बार अलग है कुछ एहसास... 

वो छोटे-छोटे कदमों को रेनकोट में चलते हुए निहारना 
 रंगबिरंगे छातों का आपस में टकराना 
 बादलों का जमीन पर उतर आना 
इस बार कोई नज़ारा नहीं दिखा खास 
इस बार अलग है कुछ एहसास... 

वो घुटनों तक पानी का भर जाना 
स्कूल और ट्रेन का बंद हो जाना 
वो बारिश में भीगे मन का ऑफिस न जाने का बहाना बनाना 
दोस्तों के साथ मिलकर चाय पकौड़े की दावत ज़माना 
हँसना खेलना, साथ में गुनगुनाना 
इस बार आया नहीं वो रास 
इस बार अलग  है कुछ एहसास... 

इस बार दिलों में अनजाना भय है 
अपनों से मिलने जुलने में भी संशय है 
जाने कहाँ से आया ये प्रलय है 
इस बार  बारिश में ये मन गीला नहीं सुखा रहेगा ये तय है 
इस बार आंखें नम है और मन थोड़ा उदास 
इस बार अलग है कुछ एहसास.... 

अलका डांगी 









पाक कला

पाक कला 

हर पल कुछ नया  बनाते
कभी सीखते कभी सीखाते 
अपने हुनर और काबिलियत से 
रसोई में चार चांद लगाते 
कभी बिगड़ी भी बना देते तो कभी 
बनाते बनाते नए पकवान की खोज कर जाते 
ये कभी रसोई के राजा - रानी, तो कभी मास्टर शेफ कहलाते... 


अपनी पाक कला और हौसला अफजाई से 
रसोई की बढ़ा दी है शान 
छोटी छोटी ट्रिक्स हो या टिप्स 
समझाते हुए बना दिया हर व्यंजन आसान 
पाक कला को रूचिकर बनाया इतना कि 
रसोई बनाने में रम गए अब बच्चे बूढे और जवान 
घर की लाजवाब रसोई और होटल का लज़ीज़ खाना 
कोई नहीं है अब इनके राज से अनजान 
चाहे शौकिया बनाए चाहे बनाए मनपसंद खान पान 
 अपने हाथों से बनाने का लुत्फ उठाकर  
अब घर घर बनने लगे सारे स्वादिष्ट पकवान... 


अलका डांगी